अश्कों के फूल चुन के संवारी है जिंदगी

कलम का सिपाही राजेश त्रिपाठी पूछो न किस तरह से गुजारी है जिंदगी। अश्कों के फूल चुन के संवारी है जिंदगी।। आंखें खुलीं तो सामने अंधियारा था घना। असमानता अभाव का माहौल था तना।। मतलब भरे जहान में असहाय हो गये। दुख दर्द मुश्किलों का पर्याय हो गये।। दुनिया के दांव पेच स... [पूरी पोस्ट]
writer Rajesh Tripathi राजेश त्रिपाठी
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[30 Sep 2009 09:02 AM]

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