"खुला ख़त :संकीर्ण विचारों वाले न बांचें ?
मित्र ............जी
सादर अभिवादन
आपका ख़त मिला . मेरी सेहत ठीक है कोई बुखार ताप नहीं है मज़ा आ गया . ख़त का मज़मून और लिफाफा भा गया बिना प्रयास के मेरा नाम विवादों के आकाश में छा गया नाम तो हुआ मेरा भी मेरे शहर का भी सच्चे सहज प्रयासों को धक्का लगा क...
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गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
ईमानदारी
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[28 Jan 2009 14:34 PM]



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