हमारे सपनो की भाषा क्‍या है....

उनींदरा पहली पोस्‍ट से जारी.... आज इतने वर्ष बाद सोचने पर लगता है हिंदी-उर्दू में फ़र्क़ कहां है। मेरे लिए तो सचमुच फ़र्क़ नहीं है। जिस दिन फ़र्क़ दिखेगा, मैं ईश्‍वर  से कहूंगा- हे ईश्‍वर , मुझे उस शून्‍य की आरे से चलो.. मुझे पीछे मुड़कर देखने पर महसूस... [पूरी पोस्ट]
writer शायदा
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[30 Sep 2009 08:00 AM]

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