कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात

कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात दोहे" नश्वर जग में हैं सभी, मिटता सब संसार, वर्तमान खोना नहीं, बीता दियो बिसार । प्रभु ने जितना है दिया, उससे कर संतोष, प्रभु के न्याय में कभी, पायेगा ना दोष । बेशक ही मुँह फेर लें, दुःख में सारे लोग, आप को तू स्वार्थ का, लगने दियो न रोग । रिश्तों की... [पूरी पोस्ट]
writer ©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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[30 Sep 2009 05:45 AM]

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