अनकही बातें
बातें कहीं भी शुरु हो जाती है. जंगली घास की तरह थोडी सी नमी में पनप जाती है. कभी गोल गोल घूम कर वहीं आ खडी हो जाती है....कभी यूं ही बरसात की तरह बरस जाती है. कभी खेतों सी लहलहाती है.....और उन पर अनाज से लगतें हैं किस्से. बातों बातों में अफसाने उग आते...
[पूरी पोस्ट]
Beji
34
7
0
7
8
[30 Sep 2009 04:35 AM]



Shuffle








