ऐ चांद! इंसानों से जरा बचकर रहना
अब सब को चांद चाहिए। चांद पर ठिकाना चाहिए। सब चांद पर जमीन की तलाश में हैं। चांद पर उन्हें भी जमीन चाहिए जिनकी धरती पर अपनी कोई जमीन नहीं है। चांद पर पानी क्या मिला हर कोई चांद का पानी पीने को बेताव है। धरती का पानी उन्हें रास नहीं आ रहा। कह रहे हैं...
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अंशुमाली रस्तोगी
आईना
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[30 Sep 2009 01:37 AM]



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