आत्मकथा के विरुद्ध

वैतागवाड़ी कमरे में घुसते ही उसे देखा. वह, सोफ़े के पास जो एक कॉर्नर रखा है, जिस पर अमूमन एक ट्रे में पानी से भरी मेरी केतली रखी होती है और पास ही हरे रंग का एक मग औंधा, और जहां अक्सर मेरे उंड़ेले जाने से कुछ बूंदें गिरी होती हैं, इन सबकी अनुपस्थिति में वह बैठी... [पूरी पोस्ट]
writer Geet Chaturvedi
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[29 Sep 2009 17:16 PM]

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