आज की नारी
बेटी आज की गाय नहीं जिसे खूंटे में बाँध दो और चरणे को थोरी सी घास दाल दो! वह आज की नारी है उसकी प्रगति जारी है! आज... न वह जलती हुई मोमबत्ती है और न पिघलता हुआ मोम, आज की नारी उन्नति की ऐसी शिला है जिसके सहयोग से समाज का नया रूप खिला है!...
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V. VIVEK
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[29 Sep 2009 10:31 AM]



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