मर्यादा और संसद

TAPASHWANI जुते चप्पल चला रहे हैं, न्याय के ठेकेदार यहाँ | मर्यादा का चिर हरण, है सदनों का पर्याय यहाँ | शर्म नहीं जिनके अन्दर ये ऐसे बड़े कलंदर है | जो फूंके घर खुद अपना, ये वो कलाबाजी बन्दर हैं | स्तर उठा रहे संसद का, ये अमर्यादित वचनों से | फूंक रहे जनता कि... [पूरी पोस्ट]
writer Tapashwani Anand
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[29 Sep 2009 10:31 AM]

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