दशानन दहन पर

चेतना के स्वर उजाले की ओर इंसानों का चेहरा (1) कल था दशानन का दहन लगना था नाभि में तीर अगन उठाए धनुश राम खड़े थे। कमर पर हाथ धरे हनुमान भी अड़े थे। दैत्य मुंह की खाए धरा पर पड़े थे। कुछ ऐसे भी जो इंसानी चेहरा लिए भीड़ में खड़े थे। खुश क्यों आज (2) राम ने जैसे ही नाभिकुण्ड में दागा... [पूरी पोस्ट]
writer चेतना के स्वर
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[29 Sep 2009 08:26 AM]

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