चकाचौंध में लौ की तलाश
सुमंत भट्टाचार्य कोई पांच साल पहले दीवाली से दो-एक रोज पूर्व मेरी आठ साल की बेटी अक्षरा ने पूरे जोश के साथ फरमाइश रखी कि दीवाली पर पूरे घर (दरअसल फ्लैट) को बिजली की लडिय़ों से सजाएंगे। हामी भरने के बावजूद मैं खुद को बेटी के जोश में शामिल ना पा सका। या...
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Geetashree
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[29 Sep 2009 06:09 AM]



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