दियार-ऐ-इश्क से गुजर जाने से पहले........

चंद मुट्ठी अशआर दियार-ऐ-इश्क़* से गुजर जाने से पहले, थे होशमंद, न थे दीवाने से पहले *इश्क का शहर सब्ज़ बाग़, सुर्ख गुल हम देख ही न पाये, खिजां आ गई बहार आने से पहले बज़्म* में उनकी मुहब्बत एक तमाशा है, मालूम न था हमें, वहां जाने से पहले *बज़्म- महफिल मेरा नाखुदा* तो न... [पूरी पोस्ट]
writer dushyant
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[29 Sep 2009 04:26 AM]

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