फोकट के गियान- झन दे सियान - पटवारी भईया के गोठ बात

अड़हा के गोठ संगी हो जोहर लओ काली के गोठ ला आगे बढ़ावत हौं संगी हो, हमर पटवारी भैया के किस्सा नई सिराय हवे, एखर तो एक ले एक किसा हवे, पटवारी ला पढ़े के बहुत सौउंख हवय, सबे तरह के पुस्तक ला पढ़थे, पुस्तक पढ़ना घलो एक ठक बीमारीच आये, घर ले पटवारीन हाँ बाजार भेजते साग... [पूरी पोस्ट]
writer lalit sharma
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[28 Sep 2009 22:21 PM]

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