असमंजस
तुम हँसती हो और हजार – हजार फूल खिल जाते हैं मेरे जीवन में । तुम रोती हो और फैल जाता है अँधेरा दूर - दूर तक मेरे जीवन में । और जब तुम चुप रहती हो निर्वात से भर जाती है मेरी आत्मा । न जाने तुम क्या चाहती हो ?...
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चंदन कुमार झा
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[28 Sep 2009 12:32 PM]



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