एक आधुनिक मनीषी ने जब गृहत्याग किया?

शब्द-योग सांसारिकता से उनका मन उचट गया है। वे कई दिनों से गृहत्याग की तैयारियों में लगे हैं। गृहत्याग से लेकर आत्मज्ञान और जनकल्याण तक उनके पास संन्यास का पूरा ब्लू प्रिंट तैयार है। एक दिव्य रात्रि को, दिव्य घड़ी में, दिव्य बोतल के घूंट पे घूंट उतारते हुए, दि... [पूरी पोस्ट]
writer अनुज

vyangya

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[28 Sep 2009 06:41 AM]

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