स्मृति शेष बनाने की दिशा में चिल्लर चिंतन

शब्द-योग चूंकि जीवन के बड़े-बड़े प्रश्न स्मृति शेष हो चुके हैं। ईमानदारी स्मृति शेष हो चुकी है। सरकारी दफ्तरों में कार्य संस्कृति स्मृति शेष हो चुकी है। देशभक्ति शेषाय रही हो। नैतिकता अपनी स्मृतियों में ही गुम हो चुकी हो। मानवता शेष की स्मृतियों में ही बची हो... [पूरी पोस्ट]
writer अनुज
views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[28 Sep 2009 06:41 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix