मेजर को सामने से गोली लगी थी
उस दिन दोपहर के दो बजे थे और सड़क के किनारे लगी गाड़ियों की एक लम्बी पंक्ति में लोगों के हाथ हवा में लहरा रहे थे वे किसी एक अभिवादन का उत्तर पाते ही दुगने जोश से सलाम बजा रहे थे. हम लोग भी सरकारी जिप्सी से बाहर निकल आये, दिल कहता था कि ये जाम भले ही सद...
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Kishore Choudhary
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[28 Sep 2009 04:28 AM]



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