आज भी प्रासंगिक हैं श्रीराम
श्रीराम का पूरा जीवन झंझावातोंसे घिरा रहा है फिर भी वे सन्मार्ग से विचलित नहीं हुए। शायद इसीलिए उन्हें परमेश्वर के बजाय पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनके सद्गुण और निर्णय आज के परिप्रेक्ष्य में अत्यंत प्रासंगिक हो उठते हैं, जिनसे हमें शिक्षा लेने की आवश्य...
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rahul pandit
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[28 Sep 2009 02:54 AM]



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