पहुँचा हुआ फकीर

पंजाबी लघुकथा भूपिंदर सिंह ए क कमरा कह लो या छोटा घर। वही सास-ससुर, वहीं पर बड़ी ननद, वहीं पर छोटा देवर। और एक तरफपति-पत्नी की दो चारपाइयाँ। जब-तब बहू का जबड़ा भिंच जाता। पल भर में हाथ-पांव ठंडे होने लगते। होठों का रंग नीला पड़ जाता। हकीमों कीदवा-बूटियां करके देखी... [पूरी पोस्ट]
writer दीपशिखा

भूपिंदर सिंह

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[28 Sep 2009 02:52 AM]

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