क़न्फ़्यूज़ियाई पोस्ट - हमका न देहौ, तऽ थरिया उल्टाइन देब -" ᵺ ᴥ א ѫ ϡ ʢ ¿ ZZ
मसल है... खाय न देब तऽ थरिया उल्टाइन देब अर्थात, हे पाठकों यदि मुझे अपनी मर्ज़ी अनुसार पसँद नहीं मिलेगी, तो मैं परसी हुई पूरी थाली उल्टा तो सकता ही हूँ ! खेद तो यह है कि, यह सब देखते देखते हो गया, जब मैं ब्लागवाणी खोल कर टिप्पण...
[पूरी पोस्ट]
डा. अमर कुमार
बेतक़ल्लुफ़
7
0
0
0
8
[28 Sep 2009 02:51 AM]



Shuffle








