क़न्फ़्यूज़ियाई पोस्ट - हमका न देहौ, तऽ थरिया उल्टाइन देब -" ᵺ ᴥ א ѫ ϡ ʢ ¿ ZZ

कुछ तो है.....जो कि ! * मसल है... खाय न देब तऽ थरिया उल्टाइन देब अर्थात, हे पाठकों यदि मुझे अपनी मर्ज़ी अनुसार पसँद नहीं मिलेगी, तो मैं परसी हुई पूरी थाली उल्टा तो सकता ही हूँ ! खेद तो यह है कि, यह सब देखते देखते हो गया, जब  मैं  ब्लागवाणी  खोल  कर टिप्पण... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार

बेतक़ल्लुफ़

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[28 Sep 2009 02:51 AM]

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