मुरली तेरा मुरलीधर 21

अखिलं मधुरम् स्वाद सुधा में है पदार्थ में स्वाद न पायेगा मधुकर सुख तो सब उसे सच्चे प्रिय में कहाँ खोजता रस निर्झर मन गृह में जम गयी धूल को पोंछ डाल आनन्द पथी टेर रहा संसारनाशिनी  मुरली   तेरा    मुरलीधर।।116।। यदि संस्कार वासनाओं से... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu
views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[27 Sep 2009 23:28 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix