कुछ कहते हुए.....ख़्वाब

MERA SAGAR कुछ कहते हुए....ख़्वाब ,   कुछ सुनते हुए....ख़्वाब,   चलो इन ख़्वाबों को,   आज अपना बनालूं, कहदूं इन्हें दिल के ,   वो सारे जज़्बात,   और आंखों में अपनी,   मैं इनको सजा लूं,   जब खोल के देखूं,   मूंदी हुई पलकें... [पूरी पोस्ट]
writer PREETI BARTHWAL
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[27 Sep 2009 21:16 PM]

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