शिकायतकर्ता को भी अपनी बात कहने का हक़ है. गिला शिकवा माफ.हेप्पी दशहरा. अब गुस्सा थूक दीजिये

जाने भी दो यारो! यह अपील दोनों हे पक्षों से है. धीरे धीरे ही मामला समझ में आया है क्यों कि पूरे दो दिन से अन्य कामों में व्यस्त था. ब्लोगवाणी बिलकुल एक निज़ी उद्यम है और इसे बिलकुल अपने ढंग से चलाने की उन्हे पूरी छूट होने ही चाहिये. जब मामला बृहत्तर ( ब्लोगर ) समाज का... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
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[27 Sep 2009 17:36 PM]

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