मुझको बड़ा आदमी बनना है

फुरसतिया लड़की वैसाखियों के सहारे धीरे-धीरे चलती है। आहिस्ता, आहिस्ता सीढ़ियां उतरती है। पहले एक पैर नीचे रखती है फ़िर आहिस्ते से दूसरा। सीढ़ियां उतर कर छुटकी सी लड़की उचक-उचककर बैसाखियों के सहारे सड़क पर चलती चली जाती है। लड़की एक दिन कारीडोर में दिख जाती है। बतिया... [पूरी पोस्ट]
writer फ़ुरसतिया

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[03 Sep 2009 03:48 AM]

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