प्रेम हो जाये, तो इन्सान तर जाये
इंसानियत फकत है क्या, इस जिंदगी का मकसद हस्ती अपनी ही मिटाकर ,इंसा एक बनाना है । रुक गया था वेबजह ही , चलते तुझे जाना है । अकेला है दिले-इंसा,अकेला ही खुदा है अकेला ही आया था ,अकेला तुझे जाना है. रुक गया था बेबजह ........................ ऊँची इन लहरो...
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रूपम
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[27 Sep 2009 11:14 AM]



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