माँ-भक्त संवाद-चार

मीठी मिर्ची भक्तों! धुएँ से मेरा दम घुट रहा है, शोर से मेरे कान फटे जा रहे हैं, तुम्हारे इन अश्लील नृत्यों मेरी आँखें शर्म से झुकी जा रही हैं। अब मुझे मुक्त करो। मुक्ति दो मुझे। -कैसी बात कर रही हो माँ! हम भक्तों को मुक्त करना तो तुम्हारा काम है। तुम स्वयं कैसे... [पूरी पोस्ट]
writer ओम द्विवेदी
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[27 Sep 2009 09:59 AM]

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