स्मृति के झरोखे से – वह पीड़ा में भी हंसता रहा

श्री सत्यनारायण भटनागर जी का पन्ना सामान्य विचार यह है कि मृत्यु के बाद सब कुछ समाप्त हो जाता है। देहावसान के बाद व्यक्ति के सुख दुःख, कर्म, अकर्म, विकर्म सब कुछ समाप्त हो जाते है और वह इस दुनिया से मुक्त हो जाता है। हमारे एक मित्र का कहना है ’आप डुबे जग डुबा’। मृत्यु के बाद कौन क्या... [पूरी पोस्ट]
writer सत्यनारायण भटनागर
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[27 Sep 2009 07:29 AM]

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