पता नहीं क्यों ?

कुछ तो है.....जो कि ! * लगता है, आजकल मैं निष्क्रीय हूँ... पूरी तौर पर तो नहीं,  कम ब कम ब्लागर पर निष्क्रीय तो हूँ ही.. पता नहीं क्यों ? इस पता नहीं क्यों का ज़वाब तलब करियेगा, तो टके भाव वह भी यही होगा कि, " पता नहीं क्यों ? " यह पता नहीं क्यों हमेशा एक नामा... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार
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[21 Jul 2009 17:59 PM]

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