धर्म और स्वामी विवेकानंद
जिस सर्वाधिक विरोधाभासी, तर्कहीन बकवास का दुनिया भर में प्रचार किया गया है, वो केवल एक भ्रमित पागल दिमाग़ का स्वाभाविक शब्दजाल है जो उसे प्रेरणा की भाषा में पारित करना चाहता है' - स्वामी विवेकानंद...
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हर्ष प्रसाद
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[21 Jul 2009 15:17 PM]



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