मसखरा कवि से अधिक प्रणम्य है

निनाद गाथा अमिताभ जी बहुत बढ़िया लिखते हैं. इसका एक बड़ा प्रमाण ये है  कि आज सुबह जब मैंने उनकी ग़ज़ल 'माना मंचों का सेवन...' पढ़ी तो अपने मन के भावों को उतारे बिना नहीं रह पाया. ये मेरे नितांत निजी भाव हैं, किसी का इनसे सहमत या असहमत होना स्वाभाविक है. पर मु... [पूरी पोस्ट]
writer अभिनव
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[21 Jul 2009 12:10 PM]

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