गुलजार की नज्म 'सूर्य ग्रहण'
कल सुबह सूर्य ग्रहण है। पूर्ण सूर्य ग्रहण। खग्रास सूर्य ग्रहण। खास चश्मा पहनें और यह अद्भुत खगोलीय घटना जरूर देखें। तब तक गुलजार साहब की यह नज्म पर पढ़ें- 'सूर्य ग्रहण' कॉलेज के रोमांस में ऐसा होता था/ डेस्क के पीछे बैठे-बैठे/ चुपके से दो हाथ सरकते...
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Nasiruddin
साहित्य
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[21 Jul 2009 11:30 AM]



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