वसीयत ........

vikram7 कौन मैं हूँ प्रिय क्या चाहते हों परिचय तुम्हारे उत्तराधिकारी से समझ आगंतुक का मनतब्य मैने कहाँ तुम्हारे एक रोटी के टुकडे की कीमत मैने बाजार में अपनी अस्मत बेच कर चुकाई हैं क्या तुम्हे अभी संतुष्टि नहीं हों पायी हैं वह हँसा और बोला जो तुमने चुकाया वह... [पूरी पोस्ट]
writer vikram7
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[21 Jul 2009 08:04 AM]

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