होता है आदमी भी खुदा

गीत-ग़ज़ल होता है आदमी भी खुदा कभी-कभी जब वो इंसाँ होता औरों के जख्म-छालों पर जब वो मरहम रखता होता दिखता नहीं है कभी खुदा बेशक उसका ही नजारा होता नजर नजर का फेर है जर्रे-जर्रे उसका ही पसारा होता बहुत दूर नहीं वो हमसे फैसले की घड़ी में इधर या उधर होता होता है आद... [पूरी पोस्ट]
writer शारदा अरोरा
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[21 Jul 2009 07:24 AM]

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