सब के लिए
कवि को देशनिकाला है कुदरत ने बनाए मिट्टी पानी पेड़ और पहाड़ इंसान ने कथनी करनी का फैलाया जंजाल कवि ने गाया कुदरत औ ' इंसान का गान दुख और राग रक्त में घुला मिट्टी में सना कवि ने छेड़ी जीवन की ऐसी खट मिट्ठी तान सुनने वालों का दिल दहला जी पिघला आंसू लुढ...
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anup
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[21 Jul 2009 05:48 AM]



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