दुष्यंत की ग़ज़ल की पैरोडी

virendra jain ke nashtar मूल गजल का मतला था- मेरे गीत तुम्हारे पास सहारा पाने आयेंगे मेंरे बाद तुम्हें ये मेरी याद दिलाने आयेंगे मिला निमंत्रण सम्मेलन का गीत, सुनाने आयेंगे गीतों से ज्यादा अपना पेमेंट पकाने आयेंगे बड़ बड़े कवि ले आयेंगे प्यारी प्यारी शिष्याएं निज बीबी से दूर र... [पूरी पोस्ट]
writer वीरेन्द्र जैन

व्यंग्य गीत

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[21 Jul 2009 01:58 AM]

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