जगह ढूंढती संवेदनाये

प्रारंभ..... कल घर से ट्रेन मे वापस आ रहा था , हजारो करोड़ के मुनाफे वाली ट्रेन मे यात्रियों का हाल देख मुनाफे पर शक होता है , जनरल बोगी की तो बात छोडिये रिजेर्वेशन बोगियों मे भी जगह तलाशना मुशिकल है , खैर जुगाड़ लगा ही लेते है तो ऊपर की बर्थ पर सामान इधर उधर कर... [पूरी पोस्ट]
writer प्रशांत गुप्ता
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[20 Jul 2009 10:12 AM]

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