रुदाली,रजनीगंधा और अभिलाषा!
अभिलाषा ------------ गुज़रे पल से पूछते रहते जीवन की परिभाषा क्या है? तौलते रहते खुशियाँ अपनी, लगता एक तमाशा सा है सौदागर सी बातें करते, जान न पाए माशा क्या है! चलता जाए जीवन यूँ ही , रुकने की यह भाषा क्या है? खोज रहे हैं रस्ते सारे, सच मिल जाए आशा क्...
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अल्पना वर्मा
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[20 Jul 2009 06:22 AM]



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