BADFAITH
दोस्त्तों बारहां एक सवाल आपको भी तंग करता है और मुझे भी ,और जब हम उसकी तलाश में दूर तक जाते हैं तो हमें पता चलता है कि सवाल तो वहीं खडा है, अनुत्तरित । से उलझती हुई कविता आपकी नजर है. आदमी आखिर है क्या ? एक बेवजह मुश्तगुबार, या असंगत चाह्तों का अम्बा...
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BAD FAITH
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[20 Jul 2009 05:18 AM]



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