और कहीं अरमान धुल रहे थे
आदम कद दीवारों से घिरा आँगन दो अल्हड जवानियों को मिलाने लगा था,, की साथ दिया तुने भी खुदा हर बूँद के साथ मिलन को सुहावना बना दिया झमाझम करके बरसते बादलों से ,, होंठ थरथरा उठे थे ,, मिलन का नव विस्तार हो रहा था . उन्ही दीवारों के बाहर कोई और भी था एक...
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gargi gupta
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[20 Jul 2009 02:35 AM]



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