लेम्बरेटा, नन्हीं परी और एक ठिठकी शाम...{एक कहानी}

पाल ले इक रोग नादां जिंदगी के वास्ते... संदेशा आये कितना वक्त बीत चुका था उसे कुछ पता नहीं। संदेशे को पढ़ते ही वो तो विचलित मन लिये घर से बाहर निकल गया था पापा का क्लासिक लेम्बरेटा स्कूटर उठाये। लाजिमी ही था...उन आँसुओं को छिपाने के वास्ते।...और अब शहर की तमाम सड़कें-गलियां लेम्बरेटा से नाप... [पूरी पोस्ट]
writer गौतम राजरिशी
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[19 Jul 2009 20:37 PM]

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