शायर, सिंह और समोसे

आलोक पुराणिक की अगड़म बगड़म कहावतें चलती रहती हैं, हालात बदल जाते हैं। कहावत चल रही है, लीक छोड़कर तीन चलें, शायर, सिंह,सपूत। सिंह तो अब बचे नहीं, तमाम अभयारण्यों से खबरें आ रही हैं कि सिंह अब देखने को भी नहीं बचे हैं। लीक क्या छोड़ेंगे, सिंह तो दुनिया ही छोड़ गये। शायरों पर बह... [पूरी पोस्ट]
writer alok

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[19 Jul 2009 18:56 PM]

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