उन सवालों के जवाब आज भी मिलना बाकी हैं
नीरज नैयर ऐसे ही अखबार पढ़ते-पढ़ते एक बहुत पुराना किस्सा याद आ गया. जो दर्दनाक तो था ही, अपने पीछे कुछ ऐसे सवालातक भी छोड़ गया था जिनके जवाब मिलना अभी बाकी हैं. बात सर्दियों के दिनों की है, हाड़कंपा देने वाली ठंड में जब कोहरे की चादर शाम से ही छाने लगती...
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Neeraj Nayyar
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[19 Jul 2009 10:58 AM]



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