भरोसा बुनियाद है ज़िन्दगी की !!!

मेरी रचनाएँ मैं इबादत करता हूँ। नमाज़ ( सलात्) पढता हूँ, हालांकि देखा जाए तो यह सब regularly करने का discipline मुझमें नही है। मेरी कोशिश रहती है की मैं रोज़ मस्जिद जाऊँ। यह मुझे एक नई ज़िन्दगी की शुरुआत जैसा लगता है। मुझे अपने धर्म, इबादत के तौर-तरीके, और क़ुरान... [पूरी पोस्ट]
writer महफूज़ अली

zindagi

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[19 Jul 2009 08:37 AM]

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