व्यंगाज़ल नैनो में मां बाप समां न पायेंगे

virendra jain ke nashtar व्यंग्यजल इसमें केवल बीबी बच्चे आयेंगे 'नैनो' में माँ-बाप समा ना पायेंगे दादाजी का रिश्ता, कोई रिश्ता है वे पापा के पापाजी कहलायेंगे माल विदेशी बिके स्वदेशी झख मारे अंधे जब पीसेंगे कुत्ते खायेंगे इतना बोझ न डालो कंधे झुक जायें अपनी डोली फिर किससे उठव... [पूरी पोस्ट]
writer वीरेन्द्र जैन
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[19 Jul 2009 08:00 AM]

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