मुरली तेरा मुरलीधर 11

अखिलं मधुरम् अगणित जन्मों की ले दारुण कर्मश्रृंखलायें मधुकर जब जो भी दीखता उसी से व्याकुल पूछ रहा निर्झर उसका कौन पता बतलाये नाम रुप गति अकथ कथा टेर रहा करुणासाध्या मुरली तेरा मुरलीधर।।66।। क्या कण कण वासी अनन्त का अन्वेषण संभव मधुकर स्वयं भावना समझ करुण वह पास उ... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu
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[19 Jul 2009 06:12 AM]

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