घर की मिट्टी बुला रही है...

अर्ज़ है... परदेस में रहके न अपने देश को भूलो तुम. दूरियां बेशक रहें, पर दिल के तारों को जोड़ो तुम.. एक चिट्ठी तो कम से कम अपनी हम को लिख दो तुम घर की मिट्टी बुला रही है, अब तो वापस आ जाओ ---------------------------------- तुम्हारा मनपसंद खाना, खलिहानों में गाना... [पूरी पोस्ट]
writer अबयज़ ख़ान
views
20
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
4
[19 Jul 2009 04:53 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix