घर की मिट्टी बुला रही है...
परदेस में रहके न अपने देश को भूलो तुम. दूरियां बेशक रहें, पर दिल के तारों को जोड़ो तुम.. एक चिट्ठी तो कम से कम अपनी हम को लिख दो तुम घर की मिट्टी बुला रही है, अब तो वापस आ जाओ ---------------------------------- तुम्हारा मनपसंद खाना, खलिहानों में गाना...
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अबयज़ ख़ान
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[19 Jul 2009 04:53 AM]



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