यह सावन शोक नसावन है....
वर्षा के आने के साथ ही प्रकृति एक नये उल्लास से भर जाती है। वैसे तो महाकवि कालिदास " आषाढस्य प्रथम दिवसे " को वर्षा ऋतु का आरंभ मानते हैं पर ज्यादातर कवियों ने सावन को चुना है। कवि का संवेदनशील मन वर्षा देवी के आकर्षण से अछूता नहीं रह पाता। भारतेंदु...
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रविकांत पाण्डेय
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[19 Jul 2009 04:33 AM]



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