"पढ़-पढ़कर बालक हुए लछ्य हीन बदहाल, है व्यवसाय न नौकरी ,जीवन है जंजाल"
कल मेरा कैमरा अस्पताल से लौट आया मैंने उसे एक पत्रिका दी ताकि वो बोर न हो ,थोडी ही व्यापार बाद वो मेरे पास आया और मुझे कुछ पढ़ कर सुनाया । वही मै आप को पढ़ना चाहता हूँ । शायद आप को सतीश वर्मा जी का यहाँ रोचक लेख पसंद आएगा ................ जीवन में अब...
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Saiyed Faiz Hasnain
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[19 Jul 2009 03:52 AM]



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