दोहे
मित्रो कई दिन से उधेडबुन में हूं. दरअसल ब्लाग ग़ज़लों का है और मन बहुत कुछ कहने को करता है. सो निर्णय किया है कि आगे से ब्लाग का कायान्तरण करते हुए ब्लाग को सारे बन्धनों से मुक्त कर दिया जाये, यानि कि अभिव्यक्ति की पूरी आज़ादी. हालांकि विचारों के लिये ए...
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संजीव गौतम
दोहे
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[19 Jul 2009 01:06 AM]



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