मृगतृष्णा
मृगतृष्णा और इंसान में उतना ही अंतर है जितना अंतर प्रेम और प्यास में जीवन और आस में है आशाओं के छोटे-बडे टापुओं को लाँघते हुये हम वहीं पहुँच पाते हैं केवल, जहाँ दूर तक फैला हुआ पानी है और लगातार लम्बी होती घनी परछाईयाँ हैं तमाम उम परछाईयों के पीछें भ...
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vipin-choudhary
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[18 Jul 2009 12:51 PM]



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